रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP): समय से पहले जन्मे बच्चों की आंखों की एक गंभीर बीमारी
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ROP क्या है? समय से पहले जन्मे बच्चों की आंखों की बीमारी | Dr. Shantanu Gupta परिचय जब कोई बच्चा समय से पहले जन्म लेता है, तो उसके शरीर के कई अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते। आंख की रेटिना भी उनमें से एक है। ऐसे बच्चों में एक विशेष बीमारी होने का खतरा रहता है जिसे रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) कहा जाता है। यदि समय पर इसकी जांच और इलाज न किया जाए, तो यह स्थायी दृष्टि हानि (Blindness) का कारण बन सकती है। अच्छी बात यह है कि यदि सही समय पर जांच हो जाए तो अधिकांश बच्चों की आंखों की रोशनी सुरक्षित रखी जा सकती है। ROP क्या है? रेटिना आंख का वह हिस्सा है जो प्रकाश को पहचानकर हमें देखने में मदद करता है। गर्भ में रहते हुए रेटिना की रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे पूरी तरह विकसित होती हैं। यदि बच्चा समय से पहले जन्म ले लेता है, तो ये रक्त वाहिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं। इसके कारण असामान्य रक्त वाहिकाएं बनने लगती हैं जिन्हें ROP कहा जाता है। किन बच्चों में ROP होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है? समय से पहले जन्मे बच्चे जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे जिन्हें NICU में भर्ती रहना पड़ा जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ी जिनकी सामान्य स्वास्थ्य स्थिति गंभीर रही किन बच्चों की ROP जांच जरूर करानी चाहिए? यदि आपका बच्चा— ✔ 34 सप्ताह या उससे पहले पैदा हुआ हो या ✔ जन्म के समय वजन लगभग 2000 ग्राम या उससे कम हो या ✔ डॉक्टर ने ROP जांच की सलाह दी हो तो आंखों की जांच अवश्य कराएं। पहली जांच कब करानी चाहिए? अधिकांश मामलों में जन्म के लगभग 4 सप्ताह के भीतर पहली ROP जांच कराई जाती है। कुछ बहुत छोटे या अधिक जोखिम वाले बच्चों में डॉक्टर इससे पहले भी जांच करने की सलाह दे सकते हैं। समय पर जांच सबसे महत्वपूर्ण है। ROP के लक्षण क्या होते हैं? शुरुआती अवस्था में ROP के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। बच्चा सामान्य दिखाई दे सकता है। इसी कारण केवल लक्षणों का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है। ROP केवल विशेषज्ञ आंखों की जांच से ही पता चलती है। ROP की जांच कैसे होती है? आंखों में ड्रॉप डाली जाती है। पुतली (Pupil) बड़ी की जाती है। विशेष उपकरण से रेटिना की जांच की जाती है। यह जांच कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। क्या जांच से बच्चे को नुकसान होता है? नहीं। यह जांच सुरक्षित होती है। बच्चे को थोड़ी असुविधा हो सकती है लेकिन इससे आंखों को नुकसान नहीं होता। यदि ROP मिल जाए तो क्या इलाज संभव है? हाँ। बीमारी की अवस्था के अनुसार इलाज किया जाता है। संभावित उपचार— लेजर उपचार आंख में विशेष दवा का इंजेक्शन कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी इलाज जितना जल्दी होगा, परिणाम उतने बेहतर होते हैं। यदि इलाज न कराया जाए तो क्या हो सकता है? गंभीर ROP में— रेटिना अलग हो सकती है आंखों की रोशनी कम हो सकती है स्थायी अंधापन हो सकता है इसीलिए समय पर जांच जीवनभर की दृष्टि बचा सकती है। माता-पिता क्या करें? डिस्चार्ज के समय ROP जांच की तारीख नोट करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई हर फॉलो-अप जांच पर अवश्य जाएं। बच्चा सामान्य दिख रहा हो तब भी जांच न छोड़ें। इलाज में देरी न करें। याद रखने योग्य बातें ✅ समय से पहले जन्मे हर बच्चे को आंखों की जांच की आवश्यकता हो सकती है। ✅ ROP का पता केवल विशेषज्ञ जांच से चलता है। ✅ समय पर इलाज से अधिकांश बच्चों की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है। ✅ जांच में देरी स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) ROP क्या है? यह समय से पहले जन्मे बच्चों की आंखों की रेटिना की बीमारी है। क्या हर प्रीमैच्योर बच्चे को ROP होता है? नहीं, लेकिन जोखिम अधिक होता है इसलिए जांच जरूरी है। क्या ROP का इलाज संभव है? हाँ, यदि समय पर पता चल जाए। क्या ROP अपने आप ठीक हो सकता है? हल्के मामलों में संभव है, लेकिन केवल डॉक्टर की निगरानी में। क्या ROP की जांच दर्दनाक होती है? नहीं, यह सुरक्षित जांच है। क्या इलाज के बाद बच्चा सामान्य देख सकता है? यदि बीमारी समय पर पकड़ में आ जाए और इलाज हो जाए, तो अच्छे परिणाम मिलने की संभावना रहती है। क्या ऑक्सीजन देने से ROP होता है? ऑक्सीजन जीवन बचाने के लिए आवश्यक होती है। उसका उपयोग डॉक्टर नियंत्रित मात्रा में करते हैं। ROP का खतरा कई कारणों से होता है, इसलिए समय पर जांच सबसे महत्वपूर्ण है। क्या एक बार जांच कराने के बाद दोबारा जांच की जरूरत होती है? हाँ, अधिकांश बच्चों को कई फॉलो-अप जांच की आवश्यकता होती है जब तक रेटिना पूरी तरह विकसित न हो जाए। निष्कर्ष यदि आपका बच्चा समय से पहले पैदा हुआ है या जन्म के समय उसका वजन कम था, तो ROP की जांच में देरी न करें। सही समय पर की गई जांच और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार आपके बच्चे की आंखों की रोशनी को जीवनभर सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
This article is for patient education. It is not a substitute for personalised medical advice, examination or diagnosis. If you have symptoms discussed here, please book an in-person consultation with a qualified ophthalmologist.
Consultant Ophthalmologist at Shantanu Netralaya Eye Hospital, Varanasi. New Delhi (MAMC / Guru Nanak Eye Centre) trained cataract, cornea and medical retina specialist. FICO (Merit).
