भेंगापन (Squint) का आधुनिक इलाज वाराणसी | बच्चों और बड़ों के लिए स्क्विंट सर्जरी
क्या भेंगापन केवल सुंदरता की समस्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण, आधुनिक इलाज, स्क्विंट सर्जरी और कैसे शान्तनु नेत्रालय, वाराणसी में डॉ. मनीषा मिश्रा पूर्वांचल के मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार प्रदान कर रही हैं।
क्या भेंगापन केवल दिखने की समस्या है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि भेंगापन केवल चेहरे की सुंदरता से जुड़ी समस्या है। यही कारण है कि अनेक परिवार वर्षों तक इलाज टालते रहते हैं।
वास्तव में भेंगापन एक नेत्र संरेखण (Eye Alignment) की समस्या है, जिसमें दोनों आँखें एक ही दिशा में नहीं देखतीं। एक आँख सीधी रहती है जबकि दूसरी अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की ओर मुड़ सकती है। यदि इसका समय पर उपचार न हो तो बच्चों में दृष्टि का विकास प्रभावित हो सकता है और वयस्कों में दोहरी दृष्टि, सिरदर्द तथा सामाजिक असहजता जैसी समस्याएँ हो सकती हैं.
भेंगापन किन लोगों में हो सकता है?
एक आम धारणा है कि भेंगापन केवल बच्चों में होता है।
लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।
भेंगापन निम्न स्थितियों में देखा जा सकता है—
जन्म से बचपन में चश्मे के नंबर के कारण चोट के बाद डायबिटीज़ या नसों की समस्या के कारण थायरॉयड संबंधी रोगों में वयस्कों में अचानक शुरू होने वाले कुछ न्यूरोलॉजिकल कारणों से
इसलिए किसी भी उम्र में आँखों का टेढ़ा होना विशेषज्ञ द्वारा जाँच का विषय है।
बच्चों में जल्दी इलाज क्यों आवश्यक है?
बच्चों के मस्तिष्क और दृष्टि का विकास शुरुआती वर्षों में तेजी से होता है।
यदि इस दौरान आँखें एक साथ काम नहीं करतीं, तो मस्तिष्क एक आँख की छवि को नज़रअंदाज़ करना शुरू कर सकता है। इससे आलसी आँख (Amblyopia) विकसित हो सकती है, जिसमें बाद में उपचार की सफलता सीमित हो सकती है।
समय पर जाँच और उपचार से बेहतर दृष्टि विकास की संभावना बढ़ जाती है।
क्या केवल चश्मे से भेंगापन ठीक हो सकता है?
कुछ प्रकार के भेंगापन में चश्मा, विशेषकर दूरदृष्टि (Hyperopia) वाले बच्चों में, आँखों को सीधा करने में मदद कर सकता है।
कुछ मरीजों में—
चश्मा पैचिंग (Amblyopia Therapy) ऑर्थॉप्टिक एक्सरसाइज नियमित फॉलो-अप
से अच्छा परिणाम मिल सकता है।
लेकिन हर मरीज में सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती और हर मरीज केवल चश्मे से भी ठीक नहीं होता। सही उपचार विस्तृत जाँच के बाद ही तय किया जाता है.
कब आवश्यक होती है स्क्विंट सर्जरी?
यदि आँखों का टेढ़ापन चश्मे या अन्य उपचारों से पर्याप्त रूप से ठीक नहीं होता, तो स्क्विंट सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
इस सर्जरी में आँखों को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों (Eye Muscles) की स्थिति को संतुलित किया जाता है ताकि दोनों आँखें बेहतर संरेखण में आ सकें।
इसका उद्देश्य हो सकता है—
आँखों का बेहतर संतुलन दोहरी दृष्टि में सुधार (उपयुक्त मामलों में) दोनों आँखों के साथ बेहतर कार्य करना चेहरे की प्राकृतिक बनावट और आत्मविश्वास में सुधार
सर्जरी सामान्यतः एक डे-केयर प्रक्रिया होती है और अधिकांश मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं.
आधुनिक स्क्विंट सेवाओं की नई दिशा: शान्तनु नेत्रालय, वाराणसी
पूर्वांचल में स्क्विंट रोगियों को अब महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होती जा रही है।
शान्तनु नेत्रालय, वाराणसी में बच्चों और वयस्कों के लिए समर्पित स्क्विंट सेवाएँ उपलब्ध हैं, जहाँ प्रत्येक मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। उपचार योजना केवल सर्जरी पर आधारित नहीं होती, बल्कि आवश्यकता के अनुसार चश्मा, एम्ब्लायोपिया प्रबंधन, ऑर्थॉप्टिक मूल्यांकन और सर्जिकल उपचार का संतुलित निर्णय लिया जाता है।
इन सेवाओं का नेतृत्व डॉ. मनीषा मिश्रा कर रही हैं, जो समर्पित प्रशिक्षित स्क्विंट एवं बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ (Dedicated Squint & Pediatric Ophthalmology Surgeon) हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है और बच्चों तथा वयस्कों दोनों के जटिल स्क्विंट मामलों के उपचार में विशेषज्ञता रखती हैं।
शान्तनु नेत्रालय की टीम में डॉ. मनीषा मिश्रा, डॉ. शांतनु गुप्ता तथा अन्य अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ मिलकर प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करते हैं, जिससे पूर्वांचल के मरीजों को आधुनिक और व्यापक नेत्र सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।
स्क्विंट सर्जरी के बारे में कुछ सामान्य भ्रांतियाँ ❌ केवल बच्चों की सर्जरी होती है।
सत्य: वयस्कों में भी सफल स्क्विंट सर्जरी की जा सकती है।
❌ यह केवल सुंदरता के लिए होती है।
सत्य: कई मरीजों में इससे आँखों का कार्य, दोहरी दृष्टि और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है.
❌ ऑपरेशन बहुत कठिन होता है।
सत्य: अधिकांश मामलों में यह एक सुरक्षित डे-केयर प्रक्रिया होती है और मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न क्या भेंगापन बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है?
कुछ मामलों में हाँ। यह कारण और प्रकार पर निर्भर करता है।
क्या बड़े होने पर भी स्क्विंट का इलाज संभव है?
हाँ। वयस्कों में भी उपचार और आवश्यकता अनुसार सर्जरी की जा सकती है।
क्या स्क्विंट सर्जरी के बाद चश्मा हट जाता है?
नहीं। सर्जरी का उद्देश्य आँखों का संरेखण सुधारना है। चश्मे की आवश्यकता अलग विषय है और मरीज की दृष्टि पर निर्भर करती है.
क्या बच्चे की आँख टेढ़ी दिखे तो इंतज़ार करना चाहिए?
नहीं। जितनी जल्दी विशेषज्ञ द्वारा जाँच होगी, उतनी बेहतर उपचार की संभावना रहती है।
निष्कर्ष
भेंगापन ऐसी समस्या नहीं है जिसे नज़रअंदाज़ किया जाए। सही समय पर पहचान, विशेषज्ञ मूल्यांकन और आधुनिक उपचार से बच्चों और वयस्कों दोनों में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
यदि आपके बच्चे की आँखें टेढ़ी दिखाई देती हैं, या किसी वयस्क में अचानक आँखों का संरेखण बदल गया है अथवा दोहरी दृष्टि की समस्या हो रही है, तो शीघ्र नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।
शान्तनु नेत्रालय, वाराणसी में पूर्वांचल के मरीजों के लिए आधुनिक स्क्विंट सेवाएँ उपलब्ध हैं, जहाँ डॉ. मनीषा मिश्रा, समर्पित स्क्विंट एवं बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ, तथा डॉ. शांतनु गुप्ता, वरिष्ठ मोतियाबिंद एवं मेडिकल रेटिना विशेषज्ञ, मिलकर समग्र और आधुनिक नेत्र उपचार प्रदान करते हैं।
This article is for patient education. It is not a substitute for personalised medical advice, examination or diagnosis. If you have symptoms discussed here, please book an in-person consultation with a qualified ophthalmologist.
Dr. Shantanu personally reviews every enquiry — usually within a few hours.
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Consultant Ophthalmologist at Shantanu Netralaya Eye Hospital, Varanasi. MBBS Gold Medalist with 4 distinctions; MS Ophthalmology from Maulana Azad Medical College & Guru Nanak Eye Centre, New Delhi. Handles complex cataract, squint (strabismus) and paediatric ophthalmology.