Skip to main content
Blog
RETINA

रेटिना लेज़र उपचार | डायबिटीज़ और रेटिना रोगों का इलाज | वाराणसी

Medically reviewed by Dr. Shantanu Kumar GuptaLast updated 05 May 2026· 5 min read

रेटिना लेज़र उपचार क्या है? डायबिटिक रेटिनोपैथी, रेटिना में छेद और अन्य रेटिना रोगों में लेज़र कब किया जाता है? जानें विशेषज्ञ से।

रेटिना लेज़र उपचार (Retinal Laser Treatment): कब ज़रूरी होता है, कैसे किया जाता है और क्या इससे दर्द होता है?

लेखक:
डॉ. शांतनु कुमार गुप्ता
एम.एस. (नेत्र रोग) | मेडिकल रेटिना विशेषज्ञ एवं मोतियाबिंद सर्जन
शांतनु नेत्रालय, वाराणसी



रेटिना क्या होती है?

रेटिना आंख के पीछे स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण परत होती है। इसे आंख का "कैमरा सेंसर" भी कहा जा सकता है। जो दृश्य हम देखते हैं, उसकी तस्वीर सबसे पहले रेटिना पर बनती है और फिर यह जानकारी ऑप्टिक नर्व के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचती है।

यदि रेटिना स्वस्थ नहीं रहे, तो देखने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इसलिए रेटिना से जुड़ी समस्याओं का समय पर पता लगाना और उनका उचित उपचार कराना बहुत आवश्यक है।


रेटिना लेज़र उपचार क्या है?

रेटिना लेज़र उपचार (Laser Photocoagulation) एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें विशेष प्रकार की लेज़र किरणों की सहायता से रेटिना के प्रभावित हिस्से का उपचार किया जाता है।

इसका उद्देश्य होता है—

  • असामान्य रक्त वाहिकाओं की वृद्धि को रोकना।

  • रेटिना में होने वाले रिसाव को नियंत्रित करना।

  • रेटिना में हुए छोटे छेद (Retinal Tear) को सील करना।

  • रेटिना डिटैचमेंट के खतरे को कम करना।

  • दृष्टि को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करना।

ध्यान रखें कि रेटिना लेज़र का उद्देश्य सामान्यतः नज़र बढ़ाना नहीं, बल्कि नज़र को और अधिक खराब होने से बचाना होता है।


किन रोगियों को रेटिना लेज़र की आवश्यकता पड़ सकती है?

1. डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy)

लंबे समय से मधुमेह (डायबिटीज़) होने पर रेटिना की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यदि नई असामान्य रक्त वाहिकाएं बनने लगें या आंख के अंदर रक्तस्राव का खतरा हो, तो रेटिना लेज़र दृष्टि बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


2. रेटिना में छेद (Retinal Tear)

यदि रेटिना में समय रहते छेद का पता चल जाए, तो उसके चारों ओर लेज़र करके उसे मजबूत किया जा सकता है। इससे भविष्य में रेटिना डिटैचमेंट होने का खतरा काफी कम किया जा सकता है।


3. रेटिना की नसों में रुकावट (Retinal Vein Occlusion)

रेटिना की नस बंद होने के बाद कुछ रोगियों में असामान्य रक्त वाहिकाएं विकसित हो सकती हैं। ऐसे मामलों में लेज़र उपचार जटिलताओं को रोकने में सहायक हो सकता है।


4. अन्य चयनित रेटिना रोग

कुछ विशेष परिस्थितियों में रेटिना विशेषज्ञ निम्न स्थितियों में भी लेज़र की सलाह दे सकते हैं—

  • Ischemic Retina

  • Peripheral Retinal Degeneration

  • कुछ अन्य रक्त वाहिका संबंधी रेटिना रोग


रेटिना लेज़र कैसे किया जाता है?

यह प्रक्रिया सामान्यतः ओपीडी में की जाती है और लगभग 10–20 मिनट में पूरी हो जाती है।

उपचार के दौरान—

  • आंख में पुतली फैलाने वाली ड्रॉप्स डाली जाती हैं।

  • आंख को सुन्न करने वाली ड्रॉप्स दी जाती हैं।

  • विशेष कॉन्टैक्ट लेंस की सहायता से रेटिना को देखा जाता है।

  • प्रभावित स्थान पर लेज़र दिया जाता है।

  • उपचार पूरा होने के बाद अधिकांश रोगी उसी दिन घर जा सकते हैं।

इस प्रक्रिया में न तो चीरा लगाया जाता है और न ही टांके लगाने की आवश्यकता होती है।


क्या रेटिना लेज़र के दौरान दर्द होता है?

यह सबसे सामान्य प्रश्नों में से एक है।

अधिकांश रोगियों को रेटिना लेज़र के दौरान तेज़ दर्द नहीं होता। उपचार से पहले आंख में सुन्न करने वाली ड्रॉप्स डाली जाती हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक आरामदायक हो जाती है।

कुछ लोगों को उपचार के दौरान—

  • हल्की चुभन,

  • चमकदार रोशनी,

  • या कुछ क्षणों के लिए हल्की असुविधा

महसूस हो सकती है। यह सामान्य बात है और अधिकांश रोगी बिना किसी बड़ी परेशानी के पूरी प्रक्रिया आराम से पूरी कर लेते हैं।


क्या रेटिना लेज़र से नज़र वापस आ जाती है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस अवस्था में है।

यदि रेटिना को पहले ही गंभीर नुकसान पहुंच चुका है, तो केवल लेज़र से खोई हुई दृष्टि हमेशा वापस नहीं आती।

रेटिना लेज़र का मुख्य उद्देश्य है—

  • बीमारी को बढ़ने से रोकना।

  • भविष्य में दृष्टि हानि के जोखिम को कम करना।

  • आंख को गंभीर जटिलताओं से बचाना।

इसी कारण समय पर जांच और उपचार सबसे महत्वपूर्ण होता है।


क्या लेज़र के बाद आराम करना पड़ता है?

अधिकांश रोगी उपचार के बाद उसी दिन घर जा सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार—

  • निर्धारित आई ड्रॉप्स का उपयोग करें।

  • फॉलो-अप पर समय से आएं।

  • यदि अचानक नज़र कम हो, बहुत अधिक दर्द हो या नए फ्लोटर्स/चमक दिखाई दें, तो तुरंत अपने नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।


क्या एक बार लेज़र कराने से समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है?

हर रोगी की स्थिति अलग होती है।

कुछ लोगों को केवल एक बार लेज़र की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ रोगियों में बीमारी की गंभीरता के अनुसार एक से अधिक सत्र (Sessions) करने पड़ सकते हैं।

कई बार बेहतर परिणाम के लिए Anti-VEGF Injection, दवाओं या अन्य उपचार की भी आवश्यकता हो सकती है।


रेटिना लेज़र के प्रमुख लाभ

  • बिना चीरा और बिना टांके की प्रक्रिया

  • सामान्यतः ओपीडी में किया जाने वाला उपचार

  • अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं

  • रेटिना डिटैचमेंट के खतरे को कम करने में सहायक

  • डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर बीमारियों में दृष्टि बचाने में महत्वपूर्ण

  • उपचार के बाद सामान्य जीवन में जल्दी वापसी


किन लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत रेटिना विशेषज्ञ से जांच कराएं—

  • अचानक धुंधला दिखाई देना

  • आंखों के सामने काले धब्बे (Floaters) बढ़ जाना

  • बार-बार चमक (Flashes) दिखाई देना

  • ऐसा महसूस होना जैसे आंख के सामने पर्दा आ गया हो

  • अचानक नज़र कम होना

  • मधुमेह होने के बावजूद दृष्टि में बदलाव


क्या डायबिटीज़ के मरीजों को नियमित रेटिना जांच करानी चाहिए?

हाँ, बिल्कुल।

यदि आपको मधुमेह है, तो भले ही देखने में कोई समस्या न हो, फिर भी साल में कम से कम एक बार Dilated Retina Examination अवश्य कराना चाहिए।

डायबिटिक रेटिनोपैथी शुरुआती अवस्था में अक्सर बिना किसी लक्षण के विकसित होती है। समय पर जांच से बीमारी का पता जल्दी चल जाता है और उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है।


शांतनु नेत्रालय, वाराणसी में रेटिना सेवाएं

शांतनु नेत्रालय, वाराणसी में आधुनिक रेटिना जांच एवं लेज़र उपचार की सुविधा उपलब्ध है। प्रत्येक रोगी की विस्तृत जांच के बाद यह तय किया जाता है कि केवल लेज़र पर्याप्त होगा या इंजेक्शन, दवा अथवा किसी अन्य उपचार की आवश्यकता है।

यदि आप वाराणसी, चंदौली, गाज़ीपुर, जौनपुर, मिर्ज़ापुर, भदोही, सोनभद्र, बलिया, मऊ या पूर्वांचल के अन्य जिलों से हैं और आपको डायबिटीज़, रेटिना में छेद, फ्लोटर्स, चमक या अचानक नज़र कम होने जैसी समस्या है, तो समय रहते रेटिना विशेषज्ञ से परामर्श लेना आपकी दृष्टि की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या रेटिना लेज़र में चीरा लगाया जाता है?

नहीं। यह पूरी तरह बिना चीरा और बिना टांके की प्रक्रिया है।

क्या रेटिना लेज़र के बाद घर जा सकते हैं?

हाँ। अधिकांश रोगी उपचार के तुरंत बाद घर जा सकते हैं।

क्या रेटिना लेज़र से चश्मा हट जाता है?

नहीं। इसका उद्देश्य चश्मे का नंबर कम करना नहीं, बल्कि रेटिना की बीमारी का उपचार करना है।

क्या हर डायबिटीज़ के मरीज को रेटिना लेज़र की आवश्यकता होती है?

नहीं। पहले विस्तृत रेटिना जांच की जाती है। लेज़र की आवश्यकता केवल उन्हीं रोगियों में होती है, जिनमें बीमारी की अवस्था उसके अनुसार हो।

क्या रेटिना लेज़र सुरक्षित है?

अनुभवी रेटिना विशेषज्ञ द्वारा उचित जांच के बाद किया गया रेटिना लेज़र सामान्यतः एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार माना जाता है।


निष्कर्ष

रेटिना की कई बीमारियां शुरुआती अवस्था में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती हैं। इसलिए समय पर जांच, सही निदान और उचित उपचार अत्यंत आवश्यक है। रेटिना लेज़र उपचार एक वैज्ञानिक, सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य आपकी दृष्टि को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। यदि आपको मधुमेह है, अचानक फ्लोटर्स या चमक दिखाई देती है, या दृष्टि में कोई बदलाव महसूस हो रहा है, तो जांच में देरी न करें। समय पर उपचार आपकी नज़र बचा सकता है।

#रेटिना लेज़र#Retina Laser#डायबिटिक रेटिनोपैथी#रेटिना स्पेशलिस्ट#वाराणसी#पूर्वांचल#आंखों का लेज़र#रेटिना उपचार#डायबिटीज़#दृष्टि बचाव
Medical disclaimer

This article is for patient education. It is not a substitute for personalised medical advice, examination or diagnosis. If you have symptoms discussed here, please book an in-person consultation with a qualified ophthalmologist.

Have a question about this article?

Dr. Shantanu personally reviews every enquiry — usually within a few hours.

Message on WhatsApp
Dr. Shantanu Kumar Gupta
Written & medically reviewed by
Dr. Shantanu Kumar Gupta
MBBS, MS, DNB, FICO (Merit)

Consultant Ophthalmologist at Shantanu Netralaya Eye Hospital, Varanasi. New Delhi (MAMC / Guru Nanak Eye Centre) trained cataract, cornea and medical retina specialist. FICO (Merit).