रेटिना इंजेक्शन के बारे में 5 गलतफहमियाँ — सच क्या है?

Anti-VEGF इंजेक्शन रेटिना की दवाओं में अब तक की सबसे बड़ी तरक्की है। फिर भी इसके बारे में कई गलतफहमियाँ फैली हुई हैं।
इलाज को 'ना' कहने से पहले हर मरीज़ को यह ज़रूर जानना चाहिए
डॉ. शांतनु गुप्ता द्वारा मोतियाबिंद एवं मेडिकल रेटिना विशेषज्ञ शांतनु नेत्रालय आई हॉस्पिटल, वाराणसी
शांतनु नेत्रालय आई हॉस्पिटल, वाराणसी में हर हफ्ते ऐसे मरीज़ आते हैं जिन्हें रेटिना इंजेक्शन लेने की सलाह दी गई होती है, और स्वाभाविक रूप से वे घबराए हुए होते हैं।
बहुत से लोग मुझसे यही कहते हैं:
"डॉक्टर साहब, किसी ने बताया कि इंजेक्शन से आँख की रोशनी चली जाती है।"
"सुना है बहुत दर्द होता है।"
"अगर एक इंजेक्शन ले लिया, तो क्या ज़िंदगीभर लेते रहना पड़ेगा?"
ये चिंताएँ बहुत आम हैं, लेकिन इनमें से ज़्यादातर तथ्यों पर नहीं बल्कि गलतफहमियों पर आधारित हैं। रेटिना इंजेक्शन — जिन्हें इंट्राविट्रियल इंजेक्शन भी कहते हैं — ने कई गंभीर आँख की बीमारियों के इलाज को पूरी तरह बदल दिया है और लाखों लोगों की नज़र बचाई है।
आइए, सच और झूठ को अलग-अलग समझते हैं।
गलतफहमी 1: रेटिना इंजेक्शन में बहुत तेज़ दर्द होता है
सच: ज़्यादातर मरीज़ों को बस हल्की-सी तकलीफ होती है।
यह सबसे आम डर है जो मैं सुनता हूँ।
इंजेक्शन से पहले हम आँख को सुन्न करने वाली दवाई की बूँदें डालते हैं। पूरी प्रक्रिया आमतौर पर कुछ मिनटों में हो जाती है, और असल इंजेक्शन तो बस कुछ ही सेकंड में लग जाता है।
ज़्यादातर मरीज़ बताते हैं कि उन्हें दर्द नहीं, बस हल्का दबाव महसूस हुआ।
प्रक्रिया के बाद एक-दो दिन तक हल्की जलन, आँसू आना, या थोड़ी किरकिरी जैसी तकलीफ हो सकती है, जो जल्दी ठीक हो जाती है।
डर अक्सर असली अनुभव से कहीं बड़ा होता है।
गलतफहमी 2: रेटिना इंजेक्शन से अंधापन हो जाता है
सच: रेटिना इंजेक्शन नज़र खोने से बचाने के लिए लगाया जाता है — न कि नज़र खराब करने के लिए।
निम्नलिखित बीमारियों में:
डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा वेट एज-रिलेटेड मैक्यूलर डीजनरेशन (AMD) रेटिनल वेन ऑक्लूज़न मायोपिक कोरॉइडल नियोवैस्कुलराइज़ेशन के कुछ मामले
आधुनिक anti-VEGF दवाइयाँ आँख के अंदर रिसाव, सूजन और असामान्य रक्त वाहिकाओं की वृद्धि को कम करने में मदद करती हैं।
किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की तरह, रेटिना इंजेक्शन में भी संक्रमण या रेटिना डिटेचमेंट जैसे बहुत कम जोखिम होते हैं, लेकिन ये जटिलताएँ बेहद दुर्लभ हैं। जब कोई रेटिना विशेषज्ञ इलाज की सलाह देता है, तो इसके फायदे जोखिम से कहीं ज़्यादा होते हैं।
गलतफहमी 3: एक इंजेक्शन से बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो जाती है
सच: ज़्यादातर रेटिना की बीमारियों में लगातार निगरानी और कभी-कभी बार-बार इलाज की ज़रूरत पड़ती है।
बहुत सी रेटिना की बीमारियाँ लंबे समय तक चलने वाली होती हैं — ठीक वैसे जैसे शुगर या हाई ब्लड प्रेशर।
इंजेक्शन की संख्या इन बातों पर निर्भर करती है:
आपकी बीमारी बीमारी की गंभीरता इलाज का असर OCT स्कैन के नतीजे नज़र में बदलाव
कुछ मरीज़ों को बस कुछ इंजेक्शन काफी होते हैं, जबकि कुछ को धीरे-धीरे बढ़ते अंतराल पर लंबे समय तक इलाज की ज़रूरत पड़ती है।
हर मरीज़ का इलाज का प्लान अलग होता है — सब पर एक ही तरीका नहीं अपनाया जाता।
गलतफहमी 4: अगर नज़र ठीक हो जाए, तो फॉलो-अप की ज़रूरत नहीं
सच: नज़र का ठीक होना यह नहीं दर्शाता कि बीमारी पूरी तरह जा चुकी है।
कई रेटिना की बीमारियाँ बिना किसी स्पष्ट लक्षण के दोबारा सक्रिय हो सकती हैं।
भले ही आपको नज़र सामान्य लगे, सूजन या असामान्य रक्त वाहिकाएँ वापस आ सकती हैं।
नियमित जाँच और OCT स्कैन से बीमारी की वापसी जल्दी पकड़ में आती है, जिससे स्थायी नुकसान होने से पहले इलाज हो सके।
फॉलो-अप छोड़ने से वह नज़र जा सकती है जिसे बचाया जा सकता था।
गलतफहमी 5: रेटिना इंजेक्शन सिर्फ बुजुर्गों के लिए होता है
सच: अलग-अलग उम्र के मरीज़ों को रेटिना इंजेक्शन की ज़रूरत पड़ सकती है।
हालाँकि एज-रिलेटेड मैक्यूलर डीजनरेशन बड़े लोगों को ज़्यादा होती है, फिर भी रेटिना इंजेक्शन इन बीमारियों में भी काम आता है:
शुगर से जुड़ी रेटिना की बीमारियाँ रेटिनल वेन ऑक्लूज़न पैथोलॉजिकल मायोपिया कुछ सूजन संबंधी आँख की बीमारियाँ सर्जरी के बाद रेटिना की कुछ जटिलताएँ
सिर्फ उम्र से यह तय नहीं होता कि किसी को इंजेक्शन की ज़रूरत है या नहीं।
रेटिना इंजेक्शन के दौरान क्या होता है?
यह प्रक्रिया आमतौर पर सीधी-सादी होती है:
आपकी नज़र और आँख का दबाव जाँचा जाता है। संक्रमण का खतरा कम करने के लिए आँख को अच्छी तरह साफ किया जाता है। सुन्न करने की बूँदें डाली जाती हैं। विट्रियस कैविटी में दवाई का इंजेक्शन लगाया जाता है। थोड़ी देर आराम करने के बाद आप घर जा सकते हैं।
ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन घर लौट जाते हैं।
इंजेक्शन के बाद डॉक्टर को कब दिखाएँ?
हल्की लालिमा और जलन सामान्य है।
लेकिन अगर ये लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ:
आँख में तेज़ दर्द अचानक नज़र कम होना लालिमा बढ़ते जाना मवाद जैसा स्राव बार-बार चमक दिखना या एकदम से कई नए धब्बे दिखना रोशनी में बहुत तेज़ जलन
ये लक्षण कम ही होते हैं, लेकिन इनकी तुरंत जाँच ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रेटिना इंजेक्शन सुरक्षित है?
हाँ। जब किसी अनुभवी रेटिना विशेषज्ञ द्वारा पूरी सफाई के साथ लगाया जाए, तो रेटिना इंजेक्शन का सुरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन है।
क्या मुझे हर महीने हमेशा के लिए इंजेक्शन लेना पड़ेगा?
ज़रूरी नहीं। इलाज की आवृत्ति आपकी आँख की बीमारी और उसके असर पर निर्भर करती है। बहुत से मरीज़ों को बाद में कम बार इंजेक्शन की ज़रूरत पड़ती है।
क्या प्रक्रिया के बाद मैं घर जा सकता हूँ?
हाँ। ज़्यादातर मरीज़ इंजेक्शन के थोड़ी देर बाद घर चले जाते हैं। बस इंजेक्शन के तुरंत बाद खुद गाड़ी न चलाने की सलाह दी जा सकती है।
क्या शुगर के मरीज़ रेटिना इंजेक्शन सुरक्षित रूप से ले सकते हैं?
हाँ। Anti-VEGF इंजेक्शन डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा और शुगर से जुड़ी रेटिना की अन्य बीमारियों के सबसे कारगर इलाजों में से एक है।
क्या मैं अपनी रोज़मर्रा की दवाइयाँ जारी रख सकता हूँ?
ज़्यादातर सामान्य दवाइयाँ जारी रखी जा सकती हैं, लेकिन खून पतला करने वाली दवाइयों, एलर्जी, या हाल की किसी बीमारी के बारे में अपने रेटिना विशेषज्ञ को ज़रूर बताएँ।
डॉ. शांतनु गुप्ता की बात
रेटिना इंजेक्शन ने अनगिनत मरीज़ों की ज़िंदगी बदल दी है — वह नज़र बचाकर जो शायद हमेशा के लिए जा सकती थी।
गलतफहमियों और अफवाहों को इलाज में देरी न करने दें। जल्दी पहचान, सही समय पर इंजेक्शन, और नियमित फॉलो-अप — यही तीनों मिलकर अच्छी नज़र बनाए रखने का सबसे बेहतर रास्ता हैं।
अगर आपको रेटिना इंजेक्शन की सलाह दी गई है और आपके मन में कोई सवाल है, तो अपने नेत्र विशेषज्ञ से खुलकर बात करें। इलाज को समझकर आप आत्मविश्वास के साथ सही फैसला ले सकते हैं।
लेखक के बारे में
डॉ. शांतनु गुप्ता वाराणसी के शांतनु नेत्रालय आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद सर्जन और मेडिकल रेटिना विशेषज्ञ हैं। वे डायबिटिक रेटिनोपैथी, रेटिनल वेन ऑक्लूज़न, एज-रिलेटेड मैक्यूलर डीजनरेशन, रेटिनल वैस्कुलर बीमारियों और उन्नत मोतियाबिंद सर्जरी के निदान व इलाज में विशेषज्ञ हैं। उनका ध्यान नवीनतम तकनीकों का उपयोग करते हुए साक्ष्य-आधारित, मरीज़-केंद्रित नेत्र देखभाल प्रदान करने पर है।
This article is for patient education. It is not a substitute for personalised medical advice, examination or diagnosis. If you have symptoms discussed here, please book an in-person consultation with a qualified ophthalmologist.
डॉ. शांतनु हर पूछताछ की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करते हैं — आमतौर पर कुछ ही घंटों में।
व्हाट्सएप पर संदेश भेजेंConsultant Ophthalmologist at Shantanu Netralaya Eye Hospital, Varanasi. New Delhi (MAMC / Guru Nanak Eye Centre) trained cataract, cornea and medical retina specialist. FICO (Merit).